Ashiqi

अब क्यों न ज़िन्दगी पे मुहब्बत को वार दें 
इस आशिक़ी में जान से जाना बहुत हुआ 

Shakl

शक्ल जब बस गई आँखों में तो छुपना कैसा
दिल में घर करके मेरी जान ये परदा कैसा